एम्स बिलासपुर में एडवांस्ड कैथ लैब से बिना ओपन सर्जरी के न्यूरो बीमारियों का इलाज
बिलासपुर।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर (एम्स बिलासपुर) में एडवांस्ड कैथ लैब के जरिए बिना ओपन सर्जरी के जटिल न्यूरो बीमारियों का इलाज किया जा रहा है। यहां साधारण सुई के जरिए एन्यूरिज्म और आर्टेरियोवेनस मैलफॉर्मेशन (AVM) का उपचार किया जाता है, जिससे मरीजों को चीरा नहीं लगाना पड़ता और उनकी रिकवरी भी तेज़ होती है।
संस्थान के अनुसार इन प्रक्रियाओं में अल्ट्रा-सॉफ्ट प्लैटिनम, निकल और टाइटेनियम एलॉय से बने कॉइल और स्टेंट जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। अब तक 70 से अधिक मरीज इन हाई-एंड ट्रीटमेंट से लाभान्वित हो चुके हैं और बेहतर क्लिनिकल परिणामों के साथ घर लौटे हैं।
एम्स बिलासपुर के न्यूरोसर्जरी विभाग में वयस्कों और बच्चों दोनों के लिए कई तरह की विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें जटिल ब्रेन और स्पाइनल ट्यूमर सर्जरी, ब्रेनस्टेम के पास होने वाले हाई-रिस्क ऑपरेशन, सर्जरी के दौरान सांस, दृष्टि और चेहरे की नसों को सुरक्षित रखने के लिए इंट्राऑपरेटिव न्यूरोमॉनिटरिंग तथा एंडोस्कोप की मदद से नाक के जरिए पिट्यूटरी ट्यूमर की सर्जरी शामिल है। इसके अलावा ब्रेन और स्पाइन ट्रॉमा, गर्दन और पीठ के गंभीर फ्रैक्चर के इलाज की भी सुविधा दी जा रही है।
संस्थान के मुताबिक भविष्य में इस्केमिक स्ट्रोक के लिए विशेष उपचार सेवाएं भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि मरीजों की रिकवरी और बेहतर हो सके।
एम्स बिलासपुर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. दलजीत सिंह ने बताया कि विभाग ने 2025 के अंत तक 500 से अधिक ब्रेन, स्पाइन और न्यूरो-इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी करने का मील का पत्थर हासिल किया है।
न्यूरोसर्जरी विभाग में डॉ. अर्जुन धर, डॉ. भानु प्रताप और डॉ. राहुल जैन मरीजों को परामर्श दे रहे हैं। ओपीडी सेवाएं सोमवार से शनिवार तक उपलब्ध हैं।
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