“अच्छा वकील वही जो मेहनत, अध्ययन और प्रस्तुति से न्याय दिलाए”—अविनाश राय खन्ना


बाहरा यूनिवर्सिटी में 5वीं मूट कोर्ट प्रतियोगिता का आयोजन, पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने किया उद्घाटन

सोलन


बाहरा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ लॉ द्वारा आयोजित 5वीं बाहरा यूनिवर्सिटी मूट कोर्ट प्रतियोगिता (16 से 18 अप्रैल 2026) का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ विधिवेत्ता अविनाश राय खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के चांसलर गुरविंदर सिंह बाहरा ने की।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि अविनाश राय खन्ना ने विधि के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एक सामान्य वकील और एक सफल वकील में सबसे बड़ा अंतर उसकी तैयारी, प्रस्तुति और दृष्टिकोण में होता है। उन्होंने कहा कि वकालत केवल धन कमाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है, जहाँ वकील अदालत और न्याय के बीच एक सेतु का कार्य करता है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक ही कानून, एक ही तथ्य और एक ही प्रक्रिया होने के बावजूद, अलग-अलग वकील अपने तर्क और प्रस्तुति के आधार पर अलग परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि गहन अध्ययन, केस की समझ और आत्मविश्वास ही सफ़लता की कुंजी है।

खन्ना ने अपने प्रारंभिक वकालत के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और एक कमज़ोर दिखने वाले केस को गहन अध्ययन और कानूनी समझ के आधार पर जीता। उन्होंने कहा कि वकील को हर केस को चुनौती के रूप में लेना चाहिए और पूरी तैयारी के साथ अदालत में प्रस्तुत होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं छात्रों को वास्तविक न्यायिक प्रक्रिया का अनुभव प्रदान करती हैं, जिससे उन्हें कानून, प्रक्रिया और प्रस्तुति कौशल सीखने का अवसर मिलता है। यह मंच भविष्य के सफ़ल वकीलों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि केस की बारीकियों, दस्तावेज़ों की समझ और कानूनी शब्दावली पर भी गहरी पकड़ बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि एक वकील को अपने मुवक्किल के साथ समय बिताना चाहिए, क्योंकि वही अपने केस का सबसे अच्छा मार्गदर्शक होता है।

कार्यक्रम में देशभर से आई विभिन्न टीमों ने भाग लिया और प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी कानूनी समझ और तर्क क्षमता का प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आशा व्यक्त की कि यह प्रतियोगिता छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सीखने का मंच सिद्ध होगी।

अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों के सर्वांगीण विकास और न्यायिक क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करते हैं।

“हिमाचल में कांग्रेस की प्रतिशोध की राजनीति—एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को निशाना बनाया जा रहा: संदीपनी भारद्वाज”



विधायक पर कार्रवाई को बेसब्र और चेस्टर हिल पर क्यों विवश हैं मुख्यमंत्री 
“कानून नहीं, बदले की भावना से हो रही कार्रवाई—जनता सब देख रही है, जवाब जरूर देगी”

शिमला
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हमीरपुर में भाजपा विधायक के परिजनों से जुड़े मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार पूरी तरह प्रतिशोध की राजनीति पर उतर आई है और सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है। जबकि चेस्टर हिल में हुआ भ्रष्टाचारी पर सरकार बिल्कुल खामोश है। सदन से लेकर सड़क तक भाजपा सवाल पूछ रही हैं और मुख्यमंत्री बचकाने बहाने बना रहे हैं। कभी कहते हैं कि हमें पता ही नहीं और कभी कहते हैं कि सीएस को हमने अब बयाना देने से मना कर दिया है? 1500 करोड़ से ज़्यादा के घोटाले जिसमें उनके नाक के नीचे का काम करने वाले अधिकारियों पर संगीन आरोप लग रहे हैं और मुख्यमंत्री को चुप्पी उनकी बेबसी बताने के लिए काफ़ी है। सवाल यह है कि वह इतने बेबस क्यों हैं? जबकि उन्ही के मुख्यमंत्री रहते उनके जिले में उनकी पार्टी को पटखनी देने वाले विधायक को प्रताड़ित करने के लिए वह क़ानूनी और नैतिकता की सारी सीमाएं लाँघ रहे हैं। 


उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कानून के नाम पर चुनिंदा कार्रवाई की जा रही है, जबकि प्रदेश में कई गंभीर मुद्दों पर सरकार पूरी तरह मौन है।
“जहां सरकार को माफियाओं और बढ़ते अपराध पर कार्रवाई करनी चाहिए, वहां वह राजनीतिक विरोधियों को दबाने में जुटी हुई है,” उन्होंने कहा।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार निष्पक्ष जांच में विश्वास नहीं रखती, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।
“यह न्याय नहीं, बल्कि सत्ता का दुरुपयोग है,” उन्होंने तीखा प्रहार किया।
उन्होंने कहा कि अदालतों में मामला विचाराधीन है और कानून अपना काम करेगा, लेकिन सरकार जिस तरह से इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर प्रस्तुत कर रही है, वह उसकी मंशा पर सवाल खड़े करता है।
“कांग्रेस सरकार को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में विपक्ष को दबाने की कोशिशें कभी सफल नहीं होतीं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान राजनीतिक बदले की कार्रवाई पर केंद्रित है।
“जनता की समस्याएं जस की तस हैं और सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है,” उन्होंने कहा।
अंत में संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि भाजपा इस तरह की राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी और जनता के बीच सच्चाई को उजागर करती रहेगी।
“हिमाचल की जनता सब देख रही है—समय आने पर इसका जवाब जरूर मिलेगा,” उन्होंने कहा।

स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में ‘दीये तले अंधेरा’, ICU में स्वास्थ्य व्यवस्था—चायल अस्पताल बना ‘रेफर सेंटर’, मरीज बेहाल : रमा ठाकुर




शिमला 
भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी रमा ठाकुर ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत जाननी हो तो चायल सिविल अस्पताल का हाल देख लेना ही काफी है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह बदहाली किसी दूरदराज क्षेत्र की नहीं, बल्कि खुद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल के विधानसभा क्षेत्र की है। यहां हालात ऐसे हैं मानो सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया हो।

रमा ठाकुर ने कहा कि करीब 40 से 50 किलोमीटर के दायरे को स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाला चायल सिविल अस्पताल आज खुद ही ‘आईसीयू’ में नजर आ रहा है। अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही जरूरी विशेषज्ञ। पूरा अस्पताल डेपुटेशन के सहारे चलाया जा रहा है, जो यह साफ दर्शाता है कि सरकार के पास न तो कोई ठोस नीति है और न ही क्षेत्र की जनता के प्रति कोई गंभीरता।

उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि अस्पताल अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है। यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार तक सही ढंग से नहीं मिल पा रहा और उन्हें सीधे शिमला, सोलन या निजी अस्पतालों की ओर भेज दिया जाता है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक है, क्योंकि उन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी होती है।
उन्होने कहा कि स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के साथ खुला अन्याय है। जब स्वास्थ्य मंत्री के अपने क्षेत्र का यह हाल है, तो बाकी प्रदेश की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्षेत्रवासियों ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि चायल सिविल अस्पताल को तुरंत प्रभाव से सुचारु रूप से चलाया जाए। विशेष रूप से मेडिसिन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ के पदों को हर हाल में जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि लोगों को अपने क्षेत्र में ही समुचित इलाज मिल सके। इसके साथ ही अस्पताल में आवश्यक उपकरणों और सुविधाओं को भी तत्काल उपलब्ध कराया जाए।


ठाकुर ने सरकार को चेताया यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सरकार को स्थानीय लोगों के आक्रोश को झेलना पड़ेगा। ऐसे किसी भी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी। सरकार इस गंभीर स्थिति को समझते हुए समय रहते कार्रवाई करे, नही तो चायल के लोग यूं ही बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का खामियाजा भुगतते रहेंगे।

नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित न होने पर भाजपा ने जताया खेद, विपक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल : कृष्ण लाल चंदेल


बिलासपुर

नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित न होने पर भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष कृष्ण लाल चंदेल ने गहरा खेद व्यक्त किया है। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर का नुकसान बताया।
 उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल थी। उन्होंने बताया कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लाया गया था, जिसका उद्देश्य महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना था।

चंदेल ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे इस महत्वपूर्ण विषय पर सकारात्मक सहयोग देने में विफल रहे। उनके अनुसार, विपक्ष की नकारात्मक भूमिका के चलते यह विधेयक पारित नहीं हो सका, जो महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा एक अहम मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं के साथ अन्याय होता है।
अंत में उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस विधेयक को पुनः प्रभावी रूप से प्रस्तुत कर शीघ्र पारित कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि महिलाओं को उनका अधिकार, सम्मान और सशक्त प्रतिनिधित्व मिल सके।

20 साल बाद घोषित अपराधी गिरफ्तार, पो सेल की टीम को मिली बड़ी सफलता



बिलासपुर 

जिला बिलासपुर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। करीब 20 वर्षों से फरार चल रहे एक उद्घोषित अपराधी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फैयाज़ अहमद पुत्र स्वर्गीय राजाब बट, निवासी गांव खुन्नू, डाकघर उध्यानपुर, तहसील एवं जिला डोडा (जम्मू-कश्मीर), उम्र लगभग 40 वर्ष, थाना भराड़ी जिला बिलासपुर में दर्ज FIR नंबर 64/2003 दिनांक 13-07-2003 धारा 381 आईपीसी के मामले में वांछित था। आरोपी को दिनांक 15-03-2013 को माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोर्ट नंबर-1, जिला बिलासपुर द्वारा उद्घोषित अपराधी घोषित किया गया था।

पो सेल (Proclaimed Offender Cell) की टीम पिछले लंबे समय से आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। लगातार प्रयासों के बाद टीम ने आरोपी को दिनांक 17-04-2026 को शाम 6:10 बजे उध्यानपुर, जिला डोडा (जम्मू-कश्मीर) से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।

इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल पंकज कुमार, हेड कांस्टेबल रवि कुमार, हेड कांस्टेबल राकेश तथा कांस्टेबल मनीष कुमार की अहम भूमिका रही।

पुलिस के अनुसार, आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इस गिरफ्तारी को पुलिस की सतत और समर्पित कार्यशैली का परिणाम बताया जा रहा है।

एसपी बिलासपुर संदीप धवल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस की टीम लंबे समय से आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी और लगातार प्रयासों के चलते यह सफलता हासिल हुई है। उन्होंने टीम की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस तरह के फरार आरोपियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोपों में 3 असिस्टेंट प्रोफेसर बर्खास्त, हिमाचल सरकार की बड़ी कार्रवाई


शिमला | 

हिमाचल प्रदेश में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। राज्य सरकार ने अलग-अलग कॉलेजों में छात्राओं से कथित छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोपों में तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तीनों मामलों में विभागीय जांच के दौरान गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए। साथ ही उन्हें भविष्य में सरकारी सेवा के लिए भी अयोग्य घोषित किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, एक मामला जिला हमीरपुर के एक राजकीय महाविद्यालय से जुड़ा है, जहां वर्ष 2024 में प्रैक्टिकल क्लास के दौरान एक छात्रा के साथ कथित अनुचित व्यवहार और गलत तरीके से छूने का आरोप सामने आया था। शिकायत के बाद आरोपी को निलंबित कर जांच शुरू की गई थी। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद अब उसे बर्खास्त कर दिया गया है।
इसके अलावा शिमला के दो अलग-अलग शिक्षण संस्थानों से जुड़े मामलों में भी छात्राओं ने छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन मामलों में भी लंबे समय से विभागीय जांच चल रही थी। जांच पूरी होने और साक्ष्यों की पुष्टि के बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए दोनों आरोपियों को भी सेवा से हटा दिया।
बताया जा रहा है कि नवंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक इन तीनों मामलों में शिकायत, निलंबन और जांच की प्रक्रिया जारी रही। जांच पूरी होने के बाद 16 अप्रैल को एक साथ कार्रवाई करते हुए तीनों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
फिलहाल देर शाम तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी या आपराधिक मुकदमे से जुड़ी नई जानकारी सामने नहीं आई है। विभागीय कार्रवाई पूरी मानी जा रही है और आदेश प्रभावी हो चुके हैं। सरकार की इस कार्रवाई को छात्राओं की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश माना जा रहा है।

भल्लू पुल बस हादसे के पीड़ितों को मिली आर्थिक सहायता, केंद्र सरकार ने निभाया वादा


बिलासपुर

बरठीं के साथ लगते भल्लू पुल के पास 7 अक्टूबर 2025 को हुए दर्दनाक बस हादसे के पीड़ित परिवारों को केंद्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई है। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
गौरतलब है कि इस हादसे में पहाड़ी दरकने से एक निजी बस मलबे की चपेट में आ गई थी, जिससे 16 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो बच्चे घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।


दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की थी। इसके बाद संबंधित प्रक्रियाएं पूरी कर अब यह राशि लाभार्थियों तक पहुंचा दी गई है।
झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपनी संवेदनशीलता को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर उतारते हुए पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि यह सहायता राशि पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम करेगी और कठिन समय में उन्हें सहारा देगी।
उन्होंने केंद्र सरकार के साथ-साथ जेपी नड्डा और सांसद अनुराग ठाकुर का भी आभार जताया। कटवाल ने कहा कि आपदा की घड़ी में केंद्र सरकार का यह सहयोग संघीय ढांचे की सच्ची भावना को दर्शाता है और जरूरतमंदों तक समय पर मदद पहुंचाने की प्रतिबद्धता को भी साबित करता है।

“अच्छा वकील वही जो मेहनत, अध्ययन और प्रस्तुति से न्याय दिलाए”—अविनाश राय खन्ना

बाहरा यूनिवर्सिटी में 5वीं मूट कोर्ट प्रतियोगिता का आयोजन, पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने किया उद्घाटन सोलन बाहरा यूनिवर्सिटी क...