खेल मैदानों पर ब्रेक और पेयजल योजनाओं में देरी पर भड़के सुरेश कश्यप, कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना


शिमला,

सुरेश कश्यप ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं, जिससे युवाओं, खिलाड़ियों और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा खेल प्रोत्साहन योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में खेल मैदानों के निर्माण के लिए दी जाने वाली 15-15 लाख रुपये की राशि इस वर्ष जारी नहीं की गई है। इसके चलते प्रदेशभर में खेल अधोसंरचना के विकास पर असर पड़ा है।
कश्यप ने कहा, “खेल मैदानों के निर्माण पर ब्रेक लगाकर कांग्रेस सरकार ने युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ किया है।”
उन्होंने विशेष रूप से कांगड़ा जिले का जिक्र करते हुए कहा कि वहां किसी भी विधानसभा क्षेत्र को इस योजना के तहत धनराशि नहीं मिली, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित खेल मैदान और जिम निर्माण कार्य अधर में लटक गए हैं।
पेयजल संकट को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। कश्यप ने कहा कि सतलुज पेयजल योजना में हो रही देरी के कारण राजधानी शिमला सहित कई क्षेत्रों में जल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि परियोजना में देरी से विश्व बैंक की वित्तीय सहायता पर भी खतरा मंडरा सकता है।
“1168 करोड़ रुपये की यह महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पा रही है, जो सरकार की लापरवाही और अक्षमता को दर्शाती है,” उन्होंने कहा।
कश्यप ने आरोप लगाया कि सरकार न तो योजनाओं को समय पर पूरा कर पा रही है और न ही बजट प्रबंधन सही तरीके से कर पा रही है, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास कार्य ठप हैं।
“यह सरकार न युवाओं की सोच रही है, न खिलाड़ियों की और न ही आम जनता की—हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है,” उन्होंने कहा।

एम्स बिलासपुर ने आंखों के इलाज में लापरवाही के आरोपों को बताया निराधार, सोशल मीडिया अफ़वाहों का किया खंडन



बिलासपुर



अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) बिलासपुर ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक मरीज की शिकायत को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि इलाज के दौरान हुई धुंधली दृष्टि किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं, बल्कि दवा का सामान्य और अस्थायी प्रभाव था।


अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, 60 वर्षीय सुनीता ठाकुर, जो लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित हैं, आंखों की रोशनी कम होने की शिकायत लेकर नेत्र रोग विभाग पहुंची थीं। जांच में उन्हें डायबिटिक रेटिनोपैथी और बाईं आंख में सूजन (एडिमा) पाई गई। तय प्रोटोकॉल के तहत 23 अप्रैल को उनकी बाईं आंख में एंटी-वीईजीएफ इंजेक्शन लगाया गया, जो पूरी तरह सफल रहा और किसी प्रकार की जटिलता सामने नहीं आई।
प्रबंधन ने बताया कि बाद में मरीज ने दाहिनी आंख में परेशानी की शिकायत की। जांच में पाया गया कि आंख को रगड़ने से कॉर्नियल एब्रेशन (पुतली पर हल्की खरोंच) हो गई थी। इसके उपचार के लिए डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक दवाएं और एट्रोपिन आई ड्रॉप्स दीं तथा आंख पर पट्टी बांधी गई।

एम्स के अनुसार, एट्रोपिन ड्रॉप्स के कारण पुतली फैलने से अस्थायी रूप से धुंधला दिखना और रोशनी से संवेदनशीलता होना सामान्य है। मरीज को इस बारे में पहले ही लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया था। हालांकि, इसी प्रभाव को गलत समझकर मरीज ने इसे लापरवाही या ‘गलत आंख के ऑपरेशन’ के रूप में सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
संस्थान ने 25 अप्रैल को मरीज की दोबारा जांच की, जिसमें दोनों आंखों की दृष्टि सामान्य पाई गई और इलाज के बाद किसी प्रकार की गिरावट दर्ज नहीं हुई।

“अस्पताल के रिकॉर्ड और उपचार प्रक्रिया पूरी तरह मानक नियमों के अनुरूप है। गलत आंख में इलाज का आरोप पूरी तरह निराधार है,” प्रबंधन ने स्पष्ट किया।
संस्थान ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाकर संस्थान की छवि खराब करने की कोशिश की गई है। आम जनता से अपील की गई है कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें।
(पुष्टि)
इस संबंध में जानकारी देते हुए कुलसचिव राकेश कुमार सिंह ने बताया कि मरीज की स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है और संस्थान में सभी उपचार प्रक्रियाएं तय मानकों के अनुसार ही की जाती हैं।

हाईकोर्ट ने कर्मचारी भर्ती अधिनियम किया खारिज, भाजपा बोली—हमारी आशंका साबित


बिलासपुर

हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को लेकर भाजपा की आशंकाएं अब सही साबित होती नजर आ रही हैं। दिसंबर 2024 में पारित और फरवरी 2025 से लागू किए गए इस अधिनियम को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसे सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि इस अधिनियम के जरिए दिसंबर 2003 या उसके बाद के अनुबंध कर्मचारियों के लाभों को पूर्वव्यापी रूप से सीमित किया गया था, जिससे कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे थे। जीतराम कटवाल ने इस मुद्दे को विधानसभा में जोरदार ढंग से उठाते हुए सरकार को पहले ही आगाह किया था, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

भाजपा के अनुसार, कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए इस अधिनियम का विभिन्न स्तरों पर विरोध हो रहा था। इसमें अनुबंध कर्मचारियों की वरिष्ठता नियुक्ति की तिथि के बजाय नियमितीकरण की तिथि से तय करने का प्रावधान किया गया था, जिससे उनके वेतनमान और पदोन्नति पर भी असर पड़ रहा था। कर्मचारियों के विरोध के बावजूद इसे लागू किया गया, लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है।


जीतराम कटवाल ने पहले ही कहा था कि प्रदेश के विकास में कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान होता है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया था कि किसी जूनियर कर्मचारी को उसके सीनियर से अधिक लाभ नहीं दिए जा सकते।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि इस अधिनियम के कारण कर्मचारियों को अदालत का रुख करना पड़ेगा, जिससे सरकार के कामकाज पर असर पड़ेगा। अब हाईकोर्ट द्वारा इस अधिनियम को खारिज किए जाने के बाद भाजपा का कहना है कि सरकार की नीतियां गलत थीं और उनकी आशंकाएं पूरी तरह सही साबित हुई हैं।

देर रात डीजे बजने पर भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्ण चंदेल के सवाल, प्रशासन पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप


बिलासपुर 

कृष्ण चंदेल ने देर रात डीजे बजने के मामले को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक पदाधिकारी के रिश्तेदार के शादी समारोह में बिलासपुर के ऑडिटोरियम में रात 12 बजे तक तेज आवाज में डीजे बजाया गया, जिससे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और ध्वनि प्रदूषण नियमों की अनदेखी हुई, लेकिन पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
उन्होंने कहा कि आम जनता द्वारा निर्धारित समय के बाद लाउडस्पीकर या डीजे बजाने पर प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है, जबकि कांग्रेस नेताओं से जुड़े कार्यक्रमों में नियमों को ताक पर रख दिया जाता है। इसे उन्होंने दोहरा मापदंड बताते हुए कानून व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।

कृष्ण चंदेल ने कहा कि जब सत्ता से जुड़े लोगों के कार्यक्रमों में कानून का उल्लंघन हो और प्रशासन चुप रहे, तो इससे यह संदेश जाता है कि प्रदेश में कानून सबके लिए समान नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नियम केवल आम लोगों और छोटे आयोजकों के लिए ही हैं।
उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि कानून का सम्मान बना रहे और भविष्य में राजनीतिक संरक्षण के आधार पर नियमों का उल्लंघन न हो। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसे मामलों को लगातार उठाती रहेगी और जनता की आवाज बनकर पक्षपातपूर्ण कार्यशैली का विरोध करेगी।

वन विभाग और वन मित्र गांव-गांव करेंगे जनसंपर्क, लाउडस्पीकर से लोगों को किया जाएगा जागरूक

बिलासपुर में आज से वन संरक्षण अभियान शुरू, जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना


बिलासपुर  :
जिला बिलासपुर में वनों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वन विभाग ने आज से एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वन विभाग के कर्मचारी और वन मित्र गांव-गांव जाकर स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे और उन्हें जंगलों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में जानकारी देंगे।
अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को जंगलों में आगजनी की घटनाओं से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत करना और वन संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। विभाग की टीमें ग्रामीणों को बताएंगी कि किस प्रकार छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़े वन अग्निकांड का कारण बन सकती हैं और इससे न केवल वन संपदा, बल्कि वन्यजीव और पर्यावरण को भी भारी क्षति होती है।

अभियान के दौरान ग्रामीणों को यह भी समझाया जाएगा  यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो जंगली जानवर अपने प्राकृतिक आवास में ही रहेंगे और गांवों की ओर उनका रुख कम होगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वनों की अहम भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।
इस संबंध में आरओ सदर नरेंद्र सिंह दयाल ने बताया कि जंगलों की सुरक्षा सीधे तौर पर मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि हम जंगलों को नुकसान पहुंचाते हैं, विशेषकर आग लगाकर, तो इसका दुष्प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। इससे न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि जंगली जानवरों और पक्षियों का जीवन भी खतरे में पड़ जाता है।


 अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए एक विशेष वाहन को पूरे सदर विधानसभा क्षेत्र में घुमाया जाएगा। इस वाहन के माध्यम से लाउडस्पीकर द्वारा “वनों को आग से कैसे बचाएं” विषय पर आम जनता को जागरूक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ सकें।
आज वन विभाग कार्यालय आरओ ऑफिस से इस जागरूकता वाहन को आरओ सदर नरेंद्र सिंह दयाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
वन विभाग ने जिले के सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय सहयोग करें, जंगलों में आग न लगाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें। विभाग का मानना है कि जनसहभागिता के बिना वनों का संरक्षण संभव नहीं है, इसलिए हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान दे।

वन विभाग और वन मित्र मिलकर करेंगे जनसंपर्क, आगजनी रोकने और वन्यजीव संरक्षण पर रहेगा फोकस

बिलासपुर में वन संरक्षण को लेकर बड़ा अभियान, गांव-गांव पहुंचकर लोगों को किया जाएगा जागरूक
:

बिलासपुर:
जिला बिलासपुर में वनों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वन विभाग ने एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वन विभाग के कर्मचारी और वन मित्र गांव-गांव जाकर स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे और उन्हें जंगलों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में जानकारी देंगे।


अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को जंगलों में आगजनी की घटनाओं से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत करना और वन संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। विभाग की टीमें ग्रामीणों को बताएंगी कि किस प्रकार छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़े वन अग्निकांड का कारण बन सकती हैं और इससे न केवल वन संपदा, बल्कि वन्यजीव और पर्यावरण को भी भारी क्षति होती है।

अभियान के दौरान ग्रामीणों को यह भी समझाया जाएगा कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो जंगली जानवर अपने प्राकृतिक आवास में ही रहेंगे और गांवों की ओर उनका रुख कम होगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वनों की अहम भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।
इस संबंध में आरओ नरेंद्र सिंह दयाल ने बताया कि जंगलों की सुरक्षा सीधे तौर पर मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि हम जंगलों को नुकसान पहुंचाते हैं, विशेषकर आग लगाकर, तो इसका दुष्प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। इससे न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि जंगली जानवरों और पक्षियों का जीवन भी खतरे में पड़ जाता है।

वन विभाग ने जिले के सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय सहयोग करें, जंगलों में आग न लगाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें। विभाग का मानना है कि जनसहभागिता के बिना वनों का संरक्षण संभव नहीं है, इसलिए हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान दे।

विदेश में पढ़ाई के नाम पर युवक से 20 लाख से अधिक की ठगी, मामला दर्ज



बिलासपुर

 विदेश में पढ़ाई के लिए वीजा दिलाने का झांसा देकर एक युवक से लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हमीरपुर जिला की तहसील ढटवाल क्षेत्र निवासी 24 वर्षीय निशांत ठाकुर ने आरोप लगाया है कि पंतेहड़ा के अभिषेक कुमार शर्मा और घुमारवीं के अधिवक्ता मनीष शर्मा ने उसे विदेश भेजने और पढ़ाई के लिए वीजा दिलवाने का भरोसा दिलाया। उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में युवक उनके झांसे में आ गया और आरोपियों को कुल 20,41,364 रुपये दे दिए।
बताया गया कि यह राशि नकद के अलावा गूगल-पे और एनईएफटी के माध्यम से दी गई। इसके बावजूद न तो युवक को वीजा दिलवाया गया और न ही उसकी रकम वापस की गई। आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसके नाम पर लोन भी ले लिया और उस राशि से वाहन खरीदने के साथ-साथ उसके बैंक खाते का दुरुपयोग किया।
पीड़ित के अनुसार इस धोखाधड़ी से उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। शिकायत मिलने के बाद घुमारवीं थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
डीएसपी विशाल वर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस द्वारा केस दर्ज कर गहन छानबीन की जा रही है।

खेल मैदानों पर ब्रेक और पेयजल योजनाओं में देरी पर भड़के सुरेश कश्यप, कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

शिमला, सुरेश कश्यप ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके है...