बिलासपुर।
जिला मुख्यालय बिलासपुर के बचत भवन में अभियोजन निदेशालय हिमाचल प्रदेश द्वारा मादक द्रव्यों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला में मादक पदार्थों की जब्ती के बाद अपनाई जाने वाली सीलिंग, नमूना संग्रहण तथा विधिसम्मत नष्ट करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित छठी राज्य स्तरीय एनकॉर्ड समिति के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने की।
कार्यशाला में अभियोजन निदेशक हिमाचल प्रदेश संजीव कटोच, पुलिस अधीक्षक बिलासपुर संदीप धवल संयुक्त संयुक्त निदेशक अभियोजन रणदीर परमार, जिला न्यायवादी बिलासपुर सी. एस. भाटिया जिला न्यायवादी बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, हमीरपुर, ऊना, सीलन व शिमला तथा इन जिलों के जिला न्यायवादी व सहायक जिला न्यायवादी और सैमिनार के विशेषज्ञ राकेश सोनी तथा भीष्म चंद जिला न्यायवादी हायर एजुकेशन शिमला उपस्थित रहे।
विशेषज्ञ अधिकारियों ने प्रतिभागियों को बताया कि मादक द्रव्य एवं मनोप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के अंतर्गत इन प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए मादक पदार्थों के सुरक्षित संरक्षण, उनके नमूनों के सही तरीके से संग्रहण तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उनके निस्तारण की व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। यदि इन प्रक्रियाओं का विधिसम्मत तरीके से पालन किया जाए तो अदालत में मामलों की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों की विश्वसनीयता बनी रहती है और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में जांच के दौरान साक्ष्य संरक्षण, दस्तावेजीकरण और निर्धारित कानूनी औपचारिकताओं का पालन अत्यंत आवश्यक है। इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनती है तथा न्यायालय में मामलों के निपटारे में भी सुविधा होती है।
कार्यशाला के माध्यम से अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों और उनसे संबंधित प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों के प्रभावी निपटान में सहायता मिल सके।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने बताया कि जिले में एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत वर्तमान में 570 मामले लंबित हैं, जबकि अब तक 51 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इन मामलों के प्रभावी निपटान के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
अभियोजन निदेशक हिमाचल प्रदेश संजीव कटोच ने अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली कमियों को दूर करते हुए यदि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तो एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों के निपटान में और अधिक प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है। बैठक में सभी जिलों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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