बिलासपुर
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को लेकर भाजपा विधायक सुधीर शर्मा की ओर से की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने कड़ा रोष जताया है। राज्य सहकारी बैंक के निदेशक एवं कांग्रेस नेता सुनील शर्मा ने टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए सुधीर शर्मा से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
सुनील शर्मा ने कहा कि राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत एवं असंयमित भाषा का इस्तेमाल राजनीतिक शालीनता के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि नेताओं को अपनी भाषा और आचरण में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि विवादित बयानबाजी के माध्यम से राजनीतिक सुर्खियां बटोरने की कोशिश की जा रही है। सुनील शर्मा ने कहा कि भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी के बीच इस तरह की बयानबाजी से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला। जनता नेताओं के कामकाज और व्यवहार को देखती है तथा व्यक्तिगत टिप्पणियों से राजनीतिक विश्वसनीयता मजबूत नहीं होती।
आम लोगों से जुड़ाव मुख्यमंत्री की कमजोरी नहीं
सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री के आम लोगों के बीच सहज व्यवहार का बचाव करते हुए कहा कि आम जनता के बीच जाकर उनसे मिलना-जुलना मुख्यमंत्री की कमजोरी नहीं, बल्कि जनता के प्रति उनके जुड़ाव और संवेदनशीलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आम लोगों के साथ बैठना, उनके बीच सहजता से समय बिताना हिमाचली समाज की सादगी, अपनापन और सामाजिक बराबरी की भावना को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि जितना अधिक आम लोगों के बीच रहेगा, उतना ही वह उनकी समस्याओं और भावनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकेगा। इसलिए मुख्यमंत्री के आम जनता के बीच सहज व्यवहार को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय हिमाचली संस्कृति और आत्मीयता के रूप में देखा जाना चाहिए।
व्यक्तिगत टिप्पणी के बजाय जनहित के मुद्दों पर हो राजनीति
सुनील शर्मा ने कहा कि विपक्ष को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत टिप्पणी के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की राजनीति में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान की परंपरा रही है और इसे बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सुधीर शर्मा से मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी पर स्पष्टीकरण देने तथा सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। सुनील शर्मा ने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं को व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं जैसे जनहित के मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए।