जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग समय-समय पर स्कूलों, कॉलेजों तथा सरकारी संस्थानों में मॉक ड्रिल और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर
हमीरपुर
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आधुनिक विज्ञान की तमाम उपलब्धियों के बावजूद भूकंप का सटीक पूर्वानुमान आज भी संभव नहीं हो सका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मजबूत आपदा प्रबंधन, भूकंपरोधी निर्माण और जन-जागरूकता है।
हमीरपुर जिला भले ही बड़े भूकंपों से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता हो, लेकिन प्रदेश के अधिकांश हिस्से भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में आते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग समय-समय पर स्कूलों, कॉलेजों तथा सरकारी संस्थानों में मॉक ड्रिल और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को भूकंप के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम की तरह भूकंप का सटीक समय और स्थान बताना अभी संभव नहीं है, क्योंकि यह पृथ्वी के भीतर विवर्तनिक प्लेटों की जटिल गतिविधियों पर निर्भर करता है। हालांकि प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली भूकंप आने के कुछ सेकंड बाद अलर्ट जारी कर सकती है, जिससे ट्रेनों को रोकने, गैस आपूर्ति बंद करने और लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का समय मिल जाता है।
आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भूकंप से होने वाली जनहानि को कम करने के लिए भवनों का निर्माण निर्धारित भूकंपरोधी मानकों के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों में नियमित मॉक ड्रिल तथा आम लोगों को आपदा के समय अपनाए जाने वाले उपायों की जानकारी देना बेहद जरूरी है।
वेनेजुएला की हालिया त्रासदी यह संदेश देती है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बेहतर तैयारी, मजबूत आधारभूत ढांचे और जागरूकता के माध्यम से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल आपदा के बाद राहत कार्यों पर नहीं, बल्कि पहले से तैयारी और जोखिम कम करने की रणनीति पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।