बिलासपुर सुनील ठाकुर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के नवजात शिशु रोग विभाग द्वारा नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (एनएनएफ) और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के सहयोग से रविवार को एडवांस्ड नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी) कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों सहित 36 स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म के समय नवजात शिशुओं को आवश्यक पुनर्जीवन (रिससिटेशन) संबंधी कौशल को मजबूत करना तथा नवजात देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाना था। कार्यशाला का उद्घाटन एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. दलजीत सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम जन्मकालीन श्वासावरोध से होने वाली नवजात मृत्यु और बीमारियों की दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएंगे।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को साक्ष्य आधारित शिक्षण, कौशल प्रदर्शन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सिमुलेशन आधारित अधिगम के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया। इसके तहत छह कौशल स्टेशन और सात सिमुलेशन अभ्यास आयोजित किए गए, जिनमें वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नवजात पुनर्जीवन तकनीकों का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान टीम आधारित प्रबंधन, प्रभावी संचार और संकट प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शैक्षणिक नेतृत्व देश के वरिष्ठ नवजात विशेषज्ञ एवं लीड इंस्ट्रक्टर डॉ. सोमशेखर निम्बालकर ने किया। संकाय दल में डॉ. नलिनी ए., डॉ. सुरजीत भारद्वाज, डॉ. अशोक गर्ग, डॉ. परविंदर सिंह और डॉ. निशांत आचार्य शामिल रहे। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेशन, वायुमार्ग प्रबंधन, छाती दबाव, वैस्कुलर एक्सेस तथा औषधि उपयोग सहित विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला में शामिल सभी 36 प्रतिभागियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। एम्स बिलासपुर के नवजात शिशु रोग विभाग ने नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में क्षमता निर्माण और सतत व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम क्षेत्र में नवजात मृत्यु दर कम करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे।