महिला आरक्षण पर भाजपा और प्रधानमंत्री ट्रोल.... संदीप सांख्यान



परिसीमन की आड़ में मातृ शक्ति से धोखा.... संदीप सांख्यान

बिलासपुर 

महिला आरक्षण और परिसीमन के पीछे की मंशा को जनता बाखूबी जानती है और जान चुकी है। सोशिल मीडिया पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री के मार्मिक उदबोधन का जबरदस्त तरीके से ट्रोल होना दर्शाता है कि देश की जनता को लंबे समय तक बरगलाया नहीं जा सकता है। ऐसे में अब भाजपा का आने वाला समय निश्चित
तौर पर खराब है। यह बात प्रैस को जारी बयान में प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया काॅर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने कही। उन्होंने कहा कि जीत की भूख में छटपटाई भाजपा परिसीमन के बहाने न सिर्फ अपनी सीटों को बढ़ाने की कवायद को अमलीजामा पहनाना चाहती है बल्कि अपने जीत के मार्जिन को भी बरकरार रखना चाहती है। लेकिन देश की जनता द्वारा चुने गए बुद्धिजीवी नेताओं ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया और इनके असली चेहरे को उजागर किया। संदीप सांख्यान ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने को लेकर वर्ष 2023 में सभी दलों ने एकमत होकर पूर्ण रूप से समर्थन दिया था और यह बिल पास भी हुआ, लेकिन हाउस में बिल का पास होना और लागू होना दोनो अलग-अलग बातें हैं। लोक सभा के 543 सीटों में आज दिन तक महिलाओं की भागीदारी 33 प्रतिशत क्यों नहीं हुई है। इसका जबाव भी लगे हाथ यदि प्रधानमंत्री जी दे देते तो ट्रोल होने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा की एनडीए ऐसा करती तो इनके आधे से ज्यादा चहेतों को पैवेलियन की राह देखनी पड़ती और इनकी जड़ें कमजोर हो जातीं, इसलिए अब महिला आरक्षण की आड़ मंे परिसीमन और सीटों के बढ़ाने का नया ढोंग रचा गया, जिसे देश की जनता ने एक सिरे से
नकार दिया है। संदीप सांख्यान ने कहा कि राज्यों से दलगत राजनीति के चलते भेदभाव करने वाली भाजपा की केंद्र सरकार आम जनता से जुड़े मसलों से कन्नी काट रही है तथा जनता को अन्य बातों में उलझाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश रसोई गैस की किल्लत से परेशान हैं, पैट्रो पदार्थों पर राशनिंग हो रही है। पैट्रो पदार्थों के दाम उछाल मार रहे हैं, मंहगाई बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है। ताजा प्रकरण में सूरत से लाखों मजदूरों का पलायन के पीछे के कारणों का भी यदि पीएम श्री खुलासा करते तो बेहतर होते, सुलग रहे पूर्वी भारत पर भी कुछ बयान आता तो राहत के साथ न्याय की उम्मीद बंधती लेकिन ऐसा हो न सका। संदीप सांख्यान ने कहा कि ऐसे बदतर हालातों मंे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था, अभिव्यक्ति की आजादी और त्वरित न्याय आदि मसले गौण हो गए
हैं। लेकिन वक्त आने पर देश की जनता पाई पाई का हिसाब चुकता करेगी, अगर वोट की कीमत तय न हुई तो।


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