बिलासपुर
जिला बिलासपुर के पंजगाई क्षेत्र में विद्युत बोर्ड द्वारा स्मार्ट मीटर लगाए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सोमवार सुबह इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों, दुकानदारों और युवा नेता व समाजसेवी रोहित ठाकुर के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने विद्युत बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की। प्रदर्शन पंजगाई बाजार के मुख्य चौक पर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्रित हुए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विद्युत बोर्ड के कर्मचारी बिना अनुमति दुकानों में स्मार्ट मीटर स्थापित कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों में रोष व्याप्त है। युवा नेता रोहित ठाकुर ने कहा कि बोर्ड के कर्मचारी नियमों की अनदेखी करते हुए दुकानदारों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दुकानदार ने जब इसका विरोध किया, तो उसकी दुकान में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उस दुकानदार के खिलाफ बरमाना थाना में शिकायत भी की गई, जो कि सरासर गलत और अन्यायपूर्ण है।
रोहित ठाकुर ने इस पूरे मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति पर उसकी सहमति के बिना इस तरह का फैसला थोपना गलत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विद्युत बोर्ड ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और जबरन मीटर लगाने की कार्रवाई जारी रखी, तो वे जिला मुख्यालय में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे। इस दौरान स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं साझा कीं।
उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर को लेकर पहले ही कई तरह की शंकाएं बनी हुई हैं, जैसे कि बिजली बिल में बढ़ोतरी और तकनीकी खामियां। ऐसे में बिना जागरूकता और सहमति के इसे लागू करना उचित नहीं है। इस प्रदर्शन में पंजगाई, धौनकोठी, रोपा और आसपास के क्षेत्रों से कई लोग शामिल हुए। इनमें छोटा राम ठाकुर, रविंदर कुमार (पूर्व प्रधान), दौलत राम ठाकुर, अमरनाथ ठाकुर, बंगालु राम, कमल वर्मा, नरेंद्र गौतम, योगेश कुमार, सुनील गौतम, राजीव भारद्वाज और ज्ञान चंद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और दुकानदारों को राहत दिलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और विद्युत बोर्ड की होगी।
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