कहलूर रियासत के प्रभावशाली वजीर मियां मानसिंह को 36 वर्ष की आयु में किया गया था पद से हटाया


₹200 मासिक पेंशन देकर जबरन रिटायर करने का उल्लेख दस्तावेज में


बिलासपुर


कहलूर रियासत के इतिहास में वजीर मियां मानसिंह का नाम एक प्रभावशाली और जनप्रिय शख्सियत के रूप में दर्ज है, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब उनका बढ़ता प्रभाव तत्कालीन शासक राजा आनंद चंद को रास नहीं आया। परिणामस्वरूप, मात्र 36 वर्ष की आयु में उन्हें वजीर पद से हटाकर ₹200 मासिक पेंशन पर जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया।

इस घटना की पुष्टि मियां मानसिंह के पौत्र सुकुमार सिंह चंदेल करते हैं। उनके अनुसार, उस समय राजा ने अपने मामा राम सिंह, जो बरठीं के समीप टिहरी गांव के निवासी थे, को नया वजीर नियुक्त किया था। रियासतकाल में इस प्रकार के राजनीतिक षड्यंत्र आम बात हुआ करते थे।
हाल ही में एक दस्तावेज सामने आया है, जिसमें मियां मानसिंह को ₹200 मासिक पेंशन दिए जाने का उल्लेख है। इस दस्तावेज पर राजा के मामा मियां रणजीत सिंह के हस्ताक्षर भी बताए जाते हैं, हालांकि दस्तावेज पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह दस्तावेज एक व्यक्ति द्वारा साझा किया गया है, जिसके पास रियासतकालीन ताड़पत्र पांडुलिपियां और अन्य ऐतिहासिक सामग्री भी मौजूद है।


मियां मानसिंह के व्यक्तित्व और प्रभाव का अंदाजा उनके समकालीनों की यादों से भी लगाया जा सकता है। अर्की की इंदिरा कुमारी, जिनका संबंध एक आजाद हिंद फौज के कर्नल (डॉक्टर) से रहा, अक्सर उनके किस्से सुनाया करती थीं। मियां मानसिंह की पौत्री सुनीता सिंह के अनुसार, इंदिरा कुमारी उन्हें अपने पास बैठाकर उनके दादा के साहस और व्यक्तित्व की कहानियां सुनाती थीं।
बताया जाता है कि मियां मानसिंह का जीवन शाही ठाठ-बाट से भरपूर था। उनके यहां प्रतिदिन दर्जनों लोग भोजन करते थे और वे जहां भी जाते, घोड़े पर सवार होकर जाते थे। भड़ोलियां क्षेत्र में उनकी सैकड़ों बीघा जमीन थी, जहां वे लंबे समय तक निवास करते और शिकार जैसे शौक पूरे करते थे।
साथ ही, वे समाजसेवा के लिए भी जाने जाते थे। कई विधवा महिलाओं को उन्होंने आश्रय दिया, जो उनके रसोईघर में कार्य करती थीं और जीवनभर वहीं रहती थीं। उनके व्यक्तित्व में एक अलग ही आकर्षण और रौब था, 
जिसका प्रभाव आम लोगों से लेकर शिक्षकों और बच्चों तक पर दिखाई देता था।
कुल मिलाकर, मियां मानसिंह केवल एक वजीर ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली, जनप्रिय और रहस्यमयी व्यक्तित्व के धनी थे, जिनकी छवि आज भी लोगों के जेहन में एक ‘रॉबिन हुड’ जैसी बनी हुई है।

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