शिमला |
हिमाचल प्रदेश में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। राज्य सरकार ने अलग-अलग कॉलेजों में छात्राओं से कथित छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोपों में तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तीनों मामलों में विभागीय जांच के दौरान गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए। साथ ही उन्हें भविष्य में सरकारी सेवा के लिए भी अयोग्य घोषित किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, एक मामला जिला हमीरपुर के एक राजकीय महाविद्यालय से जुड़ा है, जहां वर्ष 2024 में प्रैक्टिकल क्लास के दौरान एक छात्रा के साथ कथित अनुचित व्यवहार और गलत तरीके से छूने का आरोप सामने आया था। शिकायत के बाद आरोपी को निलंबित कर जांच शुरू की गई थी। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद अब उसे बर्खास्त कर दिया गया है।
इसके अलावा शिमला के दो अलग-अलग शिक्षण संस्थानों से जुड़े मामलों में भी छात्राओं ने छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन मामलों में भी लंबे समय से विभागीय जांच चल रही थी। जांच पूरी होने और साक्ष्यों की पुष्टि के बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए दोनों आरोपियों को भी सेवा से हटा दिया।
बताया जा रहा है कि नवंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक इन तीनों मामलों में शिकायत, निलंबन और जांच की प्रक्रिया जारी रही। जांच पूरी होने के बाद 16 अप्रैल को एक साथ कार्रवाई करते हुए तीनों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
फिलहाल देर शाम तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी या आपराधिक मुकदमे से जुड़ी नई जानकारी सामने नहीं आई है। विभागीय कार्रवाई पूरी मानी जा रही है और आदेश प्रभावी हो चुके हैं। सरकार की इस कार्रवाई को छात्राओं की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश माना जा रहा है।
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