(बिलासपुर सुनील ठाकुर )
नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत जिला बिलासपुर में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 154 पात्र बच्चों एवं युवाओं को विभिन्न घटकों के माध्यम से लाभान्वित करते हुए लगभग 1.69 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है। उन्होंने शनिवार को दो नए पात्र लाभार्थियों, घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के गांव छत के हाफिज और हासिफ को पात्रता प्रमाणपत्र प्रदान किए। अब दोनों लाभार्थियों को मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न कल्याणकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
राजेश धर्माणी ने बताया कि योजना के तहत सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 154 लाभार्थियों को 82.91 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा 15 लाभार्थियों को विवाह अनुदान के रूप में 30 लाख रुपये तथा 16 लाभार्थियों को गृह निर्माण सहायता के लिए 29 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए 12 पात्र लाभार्थियों को 7.41 लाख रुपये और व्यावसायिक शिक्षा के लिए पांच लाभार्थियों को करीब 88 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है। बच्चों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कोचिंग सहायता योजना के तहत एक लाभार्थी को 1.18 लाख रुपये तथा सूक्ष्म उद्यम (स्टार्टअप) स्थापित करने के लिए छह लाभार्थियों को 7.40 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है। वहीं आफ्टर केयर घटक के तहत चार पात्र लाभार्थियों को 2.32 लाख रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने बताया कि पात्र बच्चों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए 37 लाभार्थियों को 1.54 लाख रुपये की त्यौहार ग्रांट दी गई। इसके अतिरिक्त 34 लाभार्थियों को वस्त्र भत्ता के रूप में 1.70 लाख रुपये, पोषण सहायता के लिए 1.81 लाख रुपये तथा विविध आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 1.19 लाख रुपये प्रदान किए गए। वहीं 22 लाभार्थियों को एक्सपोजर विजिट कार्यक्रम के तहत लगभग एक लाख रुपये की राशि व्यय की गई।
राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना प्रदेश सरकार की संवेदनशील सोच का प्रतीक है। इसके माध्यम से निराश्रित बच्चों और युवाओं को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के करीब छह हजार निराश्रित बच्चों को 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' का दर्जा देकर उनके अभिभावक की भूमिका निभाई है और उनके समग्र विकास एवं कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।