बिलासपुर
शहर में एक्साइज विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले 15 दिनों से वाहन मालिक एक अधिकारी से मिलने के लिए लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं हो रहे। विभागीय कार्यालय से सिर्फ इतना जवाब मिलता है—"साहब आज नहीं आए हैं।"
ऐसे मामलों से साफ होता है कि यह तो विभागीय व्यवस्था में भारी खामी है, या फिर जानबूझकर लोगों को परेशान किया जा रहा है।
NOC के बिना नहीं कट रही पासिंग फीस
वाहन मालिकों का कहना है कि गाड़ी की पासिंग के लिए आवश्यक NOC न मिलने से उनका काम अटका हुआ है। एक वाहन मालिक ने बताया, "मैं दो हफ्तों से रोज़ एक्साइज ऑफिस के चक्कर काट रहा हूँ, लेकिन अधिकारी कभी मीटिंग में होते हैं, कभी दौरे पर, तो कभी ऑफिस ही नहीं आते।"
सिस्टम में गड़बड़ी या जानबूझकर लापरवाही?
ऐसे मामलों से साफ होता है कि यह तो विभागीय व्यवस्था में भारी खामी है, या फिर जानबूझकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। यह भी सवाल उठता है कि क्या यह प्रक्रिया भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक तरीका है? जब आम नागरिक को हफ्तों तक सिर्फ एक अधिकारी से मिलने के लिए इंतजार करना पड़े, तो जवाबदेही तय करने की जरूरत महसूस होती है।