सदर क्षेत्र की महिलाओं की धार्मिक यात्रा: समाजसेवी सुनील शर्मा के नेतृत्व में बंगलामुखी व ज्वाला जी मंदिर में किए दर्शन

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बिलासपुर जिला बिलासपुर के सदर विधानसभा क्षेत्र में आज एक बड़े धार्मिक आयोजन का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न महिला मंडलों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समाजसेवी एवं हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के निदेशक सुनील शर्मा की पहल पर महिलाओं को मां बंगलामुखी मंदिर और मां ज्वाला जी मंदिर के दर्शन के लिए ले जाया गया। इस धार्मिक यात्रा के दौरान महिलाओं ने मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना की और भजन-कीर्तन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। कार्यक्रम के दौरान माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। यात्रा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए महिलाओं के आने-जाने के लिए विशेष वाहन व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही यात्रा के दौरान सभी महिलाओं के लिए भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी उचित व्यवस्था की गई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर महिला मंडलों की सदस्यों ने समाजसेवी सुनील शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में एकता और सहय...

15 दिन से ऑफिस में नहीं अफसर, गाड़ी मालिक परेशानएक्साइज विभाग में लापरवाही या भ्रष्टाचार?



बिलासपुर

शहर में एक्साइज विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले 15 दिनों से वाहन मालिक एक अधिकारी से मिलने के लिए लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं हो रहे। विभागीय कार्यालय से सिर्फ इतना जवाब मिलता है—"साहब आज नहीं आए हैं।"

ऐसे मामलों से साफ होता है कि यह तो विभागीय व्यवस्था में भारी खामी है, या फिर जानबूझकर लोगों को परेशान किया जा रहा है।

NOC के बिना नहीं कट रही पासिंग फीस
वाहन मालिकों का कहना है कि गाड़ी की पासिंग के लिए आवश्यक NOC न मिलने से उनका काम अटका हुआ है। एक वाहन मालिक ने बताया, "मैं दो हफ्तों से रोज़ एक्साइज ऑफिस के चक्कर काट रहा हूँ, लेकिन अधिकारी कभी मीटिंग में होते हैं, कभी दौरे पर, तो कभी ऑफिस ही नहीं आते।"
सिस्टम में गड़बड़ी या जानबूझकर लापरवाही?
ऐसे मामलों से साफ होता है कि यह तो विभागीय व्यवस्था में भारी खामी है, या फिर जानबूझकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। यह भी सवाल उठता है कि क्या यह प्रक्रिया भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक तरीका है? जब आम नागरिक को हफ्तों तक सिर्फ एक अधिकारी से मिलने के लिए इंतजार करना पड़े, तो जवाबदेही तय करने की जरूरत महसूस होती है।

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